रतीना

2006/02/11

क्या तुम मुझ से बात करोगी

क्या तुम मुझ से बात करोगी
पहले की तरह
अपनी कब्र पर रखे पत्थर को उतार कर
कंकाल पर माँस पहन कर
तुम मुझसे बात करोगी
पहले की तरह
उसने पूछा

" कैसे?"
मैंने कहा
"माँस की बात करते हो
हड्डियाँ गल कर
बन गई हैं बुरादा
जीभ झड़ गई
आवाज आसमान में उड़ गई

" बात तो करो
सब कुछ आ जाएगा
माँस, हड्डियाँ, जीभ
और तो और
आवाज"

मैंने दरख्त की जड़ से जीभ बनाई
पत्तियों से दाँत
घाटियों में घूमती आवाज को पकड़ा
सागरी लहरों से देह बनाई
लो . अब मैं तैयार हूँ,
बतियाने के लिए

अरे अब तुम कहाँ गए?

पीठ पर अन्देशा

लपक कर गले मिलना
आता है
सिर्फ आदमी को
पंछियों की तरह चोंच से चोंच भिड़ाए बिना
जानवरों की तरह पंजे लड़ाए बिना
फिर भी
केवल आदमी है जो बेहद सतर्क रहता है
गले मिलते हुए
क्यों कि हर बार पीठ पर
छुरी का अन्देशा रहता है