वे तीन बकरियाँ हैं
काली, भूरी और मटमैली
थनों में लबलबाते दूध से ारीं
छूते ही घार धार उमगातीं
रमुआ, ललुआकी भूख मिटातीं
दूध निचौड़ छोड़ दी जाएँगी यूँ खुली
इधर उधर मुँह मार पेट भर लेंगी वे सभी
जरूरत नहीं उनकी शर्म या हया ढ़कने की
वे बकरियाँ हैं कोई लड़की नहीं
लड़की हो तो खाएगी इस घर
और दुही जाएगी उस घर
घास काट कर तो लाएगी भी तो
रोटी ही चबाएगी
चूल्हे के साथ भूख भी जलाएगी
फायदे का सौदा यही है कि
इसे बेचो और उन्हें खरीदो
लड़की आखिर लड़की ही है
कोई बकरियाँ नहीं....
आन्ध्र प्रदेश में बकरियों के बदले बेची जाती लड़कियों की खबर सुन कर
2011/09/23
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