2011/09/23

निहायत अपना

उसने मेरी हथेली सूंघी
बुदबुदाया
मैं तुम्हारा पना हूँ

उसने बालों में फूल खोंसा
पना ही समझो

मेरी कानों की लबों पर कुनकुनाया
बिल्कुल पना

मेरी खोज फिर से ाुरु हो गई
निहायत पने के लिए

मार्च २००१

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