2011/09/23

हर बार की तरह

हर बार की तरह
तुमने लकीर खींची
और बाहर चले गए
हर बार की तरह
मैं लकीरों से घिर गई

हर बार की तरह
तुमने हिरण सी चकाँचोंध फैंकी
हर बार की तरह
मैं मरीचिका बन गई

हर बार की तरह तुम
अपनी गल्ती के घेरे से
बाहर निकल गये
हर बार की तरह
मैं लकीरों में फँस गई।


१८.७.२००२

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